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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 186
स त्वप्सु तं घटं प्रास्य प्रविश्य भवनं स्वकम्‌ । सर्वाणि ज्ञातिकार्याणि यथापूर्वं समाचरेत्‌ ।।
(प्रायश्चित्त किया हुआ) वह उस घड़े को फेंककर अपने घर जाकर जाति सम्बन्धी सब कार्यों को पहले के समान करे।
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