पतित के प्रायश्चित्त कर लेने पर उसके सपिण्ड तथा समानोदक बन्धु उसके साथ शुद्ध जलाशय (तडाग, नदी आदि) में स्नानकर जल से पूर्ण नये घड़े को (उस जलाशय में) छोड़ दें।
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