दासी घटमपां पूर्ण पर्यस्येत्रेतवत्पदा ।
अहोरात्रमुपासीरन्नशौचं बान्धवैः सह ।।
उन सपिण्डों तथा समानोदक बान्धवों से प्रेरित दासी जल से भरे तथा काम में लाये गये अर्थात् पुराने घड़े को दक्षिण दिशा की ओर मुखकर पैर से ठोकर मार दे (जिससे घड़े का पानी गिर जाय), फिर वे सपिण्ड समानोदकों के साथ दिनरात अशौच मनावें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।