मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 179
संवत्सरेण पतति पतितेन सहाचरन्‌ । याजनाध्यापनाद्यौनान्न तु यानासनाशनात्‌ ।।
पतित के साथ संसर्ग (सवारी करने, एक आसन पर बैठने और एक पंक्ति में बैठकर भोजन करने) से एक वर्ष में तथा यज्ञ कराने से समन्त्र यज्ञोपवीत संस्कार कर गायत्री का उपदेश देने और योनि-सम्बन्ध (विवाह आदि) करने से तत्काल पतित हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें