पतित के साथ संसर्ग (सवारी करने, एक आसन पर बैठने और एक पंक्ति में बैठकर भोजन करने) से एक वर्ष में तथा यज्ञ कराने से समन्त्र यज्ञोपवीत संस्कार कर गायत्री का उपदेश देने और योनि-सम्बन्ध (विवाह आदि) करने से तत्काल पतित हो जाता है।
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