(भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि) यह (११।१६९-१७७) मैंने अगम्यागमन पर) पाप करने वाले चारों वर्णो का निस्तार (प्रायश्चित्त) कहा, (अब आप लोग) पतितों के साथ से हुए पापों के निस्तार को सुनिये।
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