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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 176
सा चेत्पुनः प्ररदुष्येत्तु सदृशेनोपमंत्रिता । कृच्छं चांद्रायणं चैव तदस्याः पावनं स्मृतम्‌ ।।
सजातीय पुरुष (के साथ सम्भोग करने) से दूषित वह स्त्री (प्रायश्चित्त करने के बाद) पुनः सजातीय के कहने (पर उसके साथ सम्भोग करने) से दूषित हो जाय तो उसे पवित्र करने वाले कृच्छ तथा चान्द्रायण (क्रमशः ११।२११, २१५-२१९) ब्रत कहे गये हैं।
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