चंडालांत्यस्त्रियो गत्वा भुक्त्वा च प्रतिगृह्य च ।
पतत्यज्ञानतो विप्रो ज्ञानात्साम्यं तु गच्छति ।।
चण्डाली तथा अन्त्यज (म्लेच्छ आदि) की स्त्री के साथ आज्ञानपूर्वक सम्भोग कर, भोजनकर और उनसे दान लेकर मनुष्य पतित होता है और अज्ञानपूर्वक उक्त कार्यो को करने पर उनके समान (भ्रष्ट) हो जाता है।
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