अमानुषी (गाय को छोड़कर घोड़ी, बकरी, भेड आदि), रजस्वला स्त्री, अयोनि (मुख-गुदा आदि) तथा पानी में वीर्यपात करके पुरुष को कृच्छुसान्तपन (११।२११) व्रत करना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।