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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 172
अमानुषीषु पुरुष उदक्यायामयोनिषु । रेतः सिक्त्वा जले चैव कृच्छं सांतपनं चरेत्‌ ।।
अमानुषी (गाय को छोड़कर घोड़ी, बकरी, भेड आदि), रजस्वला स्त्री, अयोनि (मुख-गुदा आदि) तथा पानी में वीर्यपात करके पुरुष को कृच्छुसान्तपन (११।२११) व्रत करना चाहिए।
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