उक्त तीनों (११।१७०) प्रकार की बहनों को विद्वान् पुरुष भार्या के रूप में स्वीकार (उनके साथ विवाह) न करे; क्योंकि बान्धव होने से विवाह के अयोग्य उनके साथ विवाह करता हुआ मनुष्य नरक को जाता है।
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