गुरुतल्पव्रतं कुयद्रितः सिक्त्वा स्वयोनिषु ।
सख्युः पुत्रस्य च स्त्रीषु कुमारीष्वन्त्यजासु च ।।
सोदर भगिनी (सगी बहन), मित्र-स्त्री, पुत्र-स्त्री कुमारी तथा चण्डाली के साथ (सम्भोग में) वीर्यपातकर गुरुपत्नी के साथ सम्भोग करने का (११।१०२-१०५) प्रायश्चित्त करना चाहिये।
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