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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 167
कार्पासकीटजोर्णानां द्विशफैकखुरस्य च । पक्षिगन्धौषधीनां च रज्ज्वाश्चैव त्र्यहं पयः ।।
रूई, रेशम, ऊन (या सूती, रेशमी, ऊनी कपड़ा) दो खुरों वाले (गाय, बैल, भौंस आदि), एक खुरवाले (घोड़ा, गधा आदि) पशु, पक्षी, गन्ध (कर्पूर, कस्तूरी, चन्दन आदि), औषधि, रस्सी; इन्हें चुराकर तीन दिन तक केवल दुग्धपान करे।
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