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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 166
मणिमुक्ताप्रवालानां ताम्रस्य रजतस्य च । अयः कांस्योपलानां च द्वादशाहं कणान्नता ।।
मणि (पन्ना, माणिक्य आदि) मोती, मूँगा, ताँबा, चाँदी, लोहा, कांसा और पत्थर, इनको चुराकर बारह दिन तक अन्न का कण (खुद्दी), ही खावे।
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