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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 165
तृणकाष्ठद्रुमाणां च शुष्कान्नस्य गुडस्य च । चेलचर्मामिषाणां च त्रिरात्रं स्यादभोजनम्‌ ।।
तृण, लकड़ी, पेड़, सूखा अन्न (गेहूँ, चना, चावल आदि), गुड़, कपड़ा, चमड़ा और मांस; इसके चुराने पर तीन रात उपवास करे।
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