भक्ष्यभोज्यापहरणे यानशय्यासनस्य च ।
पुष्पमूलफलानां च पञ्चगव्यं विशोधनम् ।।
भक्ष्य (मिठाई-लडू आदि), भोज्य (खीर आदि), सवारी (गाड़ी, रथ, पालकी, रेक्सा, सायकिल, मोटर आदि), शय्या, आसन, फूल, मूल और फल; इन्हे चुराने पर पञ्चगव्य पीने से शुद्धि (पापनिवृत्ति) होती है।
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