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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 161
धान्यान्नधनचौर्याणि कृत्वा कामाद्द्विजोत्तमः । स्वजातीयगृहादेव कृच्छाब्देन विशुध्यति ।।
ब्राह्मण ब्राह्मण के घर से धान्य, अन्न आदि धन को ज्ञानपूर्वक चुराकर एक वर्ष तक प्राजापत्य ब्रत (११।२१०) करने से शुद्ध (दोषरहित) होता है।
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