(भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि) अभक्ष्य भक्षण करने पर प्रायश्चित्तं के इस (११।१४५-१५९) विविध विधान को (मैने) कहा; अब चोरी के दोष को नष्ट करने वाले प्रायश्चित्तों के विधान को (११।१६११६५) आप लोग सुनें।
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