खलिहान से, खेत से, घर से अथवा जहाँ कहीं से भी मिल सके वहीं से यागादि सत्कर्म से वर्जित और हीन कर्म करने वाले के भी धान्य (अन्न) को (छ: शाम का उपवास किया हुआ मनुष्य चौथे दिन भी उपायान्तर से अन्न प्राप्त होने का ठिकाना नहीं लगने पर चोरी आदि से) लावे और यदि उस धान्य का स्वामी पूछे कि "तूमने मेरा धान्य क्यों लिया?" तो उस पूछने वाले धान्य स्वामी से कह दे कि "मैंने खाने के लिए लिया"।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।