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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 16
खलात्क्षेत्रादगाराद्वा यतो वाप्युपलभ्यते । आख्यातव्यं तु तत्तस्मै पृच्छते यदि पृच्छति ।।
खलिहान से, खेत से, घर से अथवा जहाँ कहीं से भी मिल सके वहीं से यागादि सत्कर्म से वर्जित और हीन कर्म करने वाले के भी धान्य (अन्न) को (छ: शाम का उपवास किया हुआ मनुष्य चौथे दिन भी उपायान्तर से अन्न प्राप्त होने का ठिकाना नहीं लगने पर चोरी आदि से) लावे और यदि उस धान्य का स्वामी पूछे कि "तूमने मेरा धान्य क्यों लिया?" तो उस पूछने वाले धान्य स्वामी से कह दे कि "मैंने खाने के लिए लिया"।
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