अपनी शुद्धि चाहने वाले को अभक्ष्य अन्नादि नहीं खाना-पीना चाहिए, अज्ञानपूर्वक खाये हुए उन पदार्थो का वमन कर देना चाहिये (और उसके असम्भव होने पर) शुद्धिकारक प्रायश्चित्त से शुद्धि कर लेनी चाहिए।
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