बिडालकाकाखूच्छिष्टं जग्ध्वा श्वनकुलस्य च ।
केशकीटावपन्नं च पिबेदब्रह्मसुवर्चलाम् ।।
मार्जार, कौआ, चूहा, कुत्ता, नेवला इनका जूठा तथा बाल और कीड़े आदि से दूषित अन्न आदि को खाकर उष्ण पानी पीवे।
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