जो ब्रह्मचर्यावस्था में रहने वाले द्विज किसी प्रकार (अज्ञान से या आपत्ति काल से) मधु (शहद) या मांस का भक्षण कर ले तो वह प्राजापत्य व्रत (११।२१०) करके अपने शेष ब्रह्मचर्य व्रत को पूरा करे।
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