मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 157
व्रतचारी तु यो5श्नीयान्मधु मांसं कथञ्चन । स कृत्वा प्राकृतं कृच्छं व्रतशेषं समापयेत्‌ ।।
जो ब्रह्मचर्यावस्था में रहने वाले द्विज किसी प्रकार (अज्ञान से या आपत्ति काल से) मधु (शहद) या मांस का भक्षण कर ले तो वह प्राजापत्य व्रत (११।२१०) करके अपने शेष ब्रह्मचर्य व्रत को पूरा करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें