अभोज्यानां तु भुक्त्वाऽन्नं स्त्रीशूद्रोच्छिष्टमेव च ।
जग्ध्वां मांसमभक्ष्यं च सप्तरात्रं यवान्पिबेत् ।।
जिनका अन्न नहीं खाना चाहिये उन (४।२०५-२२०) का अन्न, (द्विजातियों की) स्त्रियों का तथा शूद्र का जूठा, अभक्ष्य (११।१५५) मांस को खाकर सात रात तक (पतला कर) यव को पीवे।
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