छ: जून (तीन दिन-तीन रात) जिसने भोजन नहीं किया हो; वह मनुष्य चौथे दिन भी (कहीं भोजन का ठिकाना नहीं लगने पर) हीन दानादि (शुभकर्म से वर्जित) कर्म वाले पुरुष के यहाँ से भी एक दिन भोजन करने योग्य अन्न (चोरी या बलात्कार से भी) लावे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।