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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 146
अपः सुराभाजनस्थ मद्यभाण्डस्थितास्तथा । पञ्चरात्रं पिबेत्पीत्वा शङ्खपुष्पीश्रृतं पयः ।।
पैष्टी (आटे की बनी हुई) सुरा तथा दूसरे प्रकार से बनी हुई मदिरा के वर्तन का जल पीकर शङ्कपुष्पी (शाङ्काहुली-कवडेना) नामक ओषधि को डालकर पकाये हुए दूध को पीना चाहिये।
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