मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 145
आज्ञानाद्दारुणीं पीत्वा संस्कारेणैव शुध्यति । प्रतिपूर्वमनिर्हेश्यं प्राणान्तिकमिति स्थितिः ।।
द्विज अज्ञान से वारुणी को पीकर पुनः संस्कार (११।१४९) से ही शुद्ध (पाप रहित) होता है तथा ज्ञान से पीकर मरकर ही शुद्ध होता है, ऐसी (शास्त्र की) मर्यादा है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें