(भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि) ज्ञान या अज्ञान से की गयी हिंसा से उत्पन्न सब पाप इन (१२।७२-११२) ब्रतों से नष्ट होते हैं। अब अभक्ष्य भक्षण के प्रायश्चित्त को (आप लोग) सुनें।
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