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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 144
एतैर्ब्रतैरपोह्यं स्यादेनो हिंसासमुद्भवम्‌ । ज्ञानाज्ञानकृतं कृत्स्नं श्रृणुतानाद्यभक्षणे ।।
(भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि) ज्ञान या अज्ञान से की गयी हिंसा से उत्पन्न सब पाप इन (१२।७२-११२) ब्रतों से नष्ट होते हैं। अब अभक्ष्य भक्षण के प्रायश्चित्त को (आप लोग) सुनें।
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