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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 143
कृष्टजानामोषधीनां जातानां च स्वयं वने । वृथालम्भेऽ नुगच्छेद्नां निनमेकं पयोव्रतः ।।
खेती से उत्पन्न (साठी आदि) तथा वन आदि में स्वयं उत्पन्न (नीवार आदि) ओषधियों (१।४६) को निष्प्रयोजन नष्ट करने पर केवल दूध का आहार लेकर | (पूर्वोक्त (११।९९-११३) विधि से) एक दिन गौ का अनुगमन (सेवन) करे।
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