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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 137
जीनकार्मुकबस्तावीन्पृथग्दद्याद्विशुद्धये । चतुर्णामपि वर्णानां नारीर्हत्वाऽनवस्थिताः ।।
लोभ से ऊ॑च-नीच पुरुष के साथ व्यभिचार करने वाली ब्राह्मणादि चारों वर्णो की स्त्रियों का वध करने पर क्रमशः चर्मपुट (चमड़े का कुप्पा), धनुष, बकरा और भेंड़ दान करे।
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