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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 136
क्रव्यादांस्तु मृगान्हत्वा धेनुं दद्यात्पयस्विनीम्‌ । अक्रव्यादान्वत्सतरीमुष्टरं हत्वा तु कृष्णलम्‌ ।।
क्रव्याद (कच्चे माँस खाने वाले बाघ आदि) पशु का वधकर दुधारू गाय, अक्रव्याद (माँस नहीं खोने वाले मृग आदि) पशु का वध कर प्रौढ़तर बछिया तथा उँट का वध कर एक कृष्णल (रत्ती-८।१३४) सोना दान करे।
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