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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 135
वासो दद्याद्धयं हत्वा पंच नीलान्वृषान्गजम्‌ । अजमेषावनड्बहं खरं हत्वैकहायनम्‌ ।।
घोड़े का वध कर कपड़ा, हाथी का वध कर पाँच नीले बैल, अज (खसी) तथा भेड़ का वध कर बैल और गधे का वध कर एक वर्ष का बछड़ा दान करे।
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