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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 133
घृतकुम्भं वराहे तु तिलद्रोणं तु तित्तिरौ । शुके द्विहायनं वत्सं क्रौचं हत्वा त्रिहायनम्‌ ।।
सूअर का वध करने पर घी से भरा घड़ा, तीतर के वध करने पर एक द्रोण (१६ सेर) तिल, तोते का वध करने पर दो वर्ष का बछड़ा और क्रौञ्च पक्षी का वध करने पर तीन वर्ष का बछड़ा दान करे।
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