पयः पिबेत्रिरात्रै वा योजनं वाऽध्वनो व्रजेत् ।
उपस्पृशेत्स्रवन्त्यां वा सूक्तं वाऽब्दैवतं जपेत् ।।
अथवा (उक्त ११।१३०) मार्जार आदि को मारने वाला तीन रात दूध पीवे, या एक योजन (चार कोश) गमन करे, या नदी में स्नान करे अथवा 'अब्दैवत' सूक्त (वरुण हैं देवता जिसका ऐसा “आपो हिष्ठा मयो भुवः......... " इस मन्त्र) को जपे।
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