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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 130
मार्जारनकुलौ हत्वा चाषं मण्डूकमेव च । श्रगोधोलूककाकांश्च शूद्रहत्याव्रतं चरेत्‌ ।।
बिल्ली, नेवला, चाष.(नीलकण्ठ) पक्षी, मेढ़क, कुत्ता, गोह, उल्लू और कोवा; इनमें से किसी को मारकर शूद्रहत्या के व्रत (प्रायश्चित्त) को करे।
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