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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 126
अकामतस्तु राजन्यं विनिपात्य द्विजोत्तमः । वृषभैकसहस्रा गा दद्यात्सुचरितव्रतः ।।
अनिच्छापूर्वक क्षत्रिय का वध करने वाला ब्राह्मण अच्छी तरह व्रतकर एक बैल के साथ सहस्र गायों को ब्राह्मण के लिये देवे।
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