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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 125
तुरीयो ब्रह्महत्यायाः क्षत्रियस्य वधे स्मृतः । वैश्येऽष्टमांशो वृत्तस्थे शूद्रे ज्ञेयस्तु षोडशः ।।
ब्रह्महत्या का चौथाई भाग क्षत्रिय के वध करने पर, आठवाँ भाग सदाचारी वैश्य का वध करने पर और सोलहवाँ भाग शूद्र के वध करने पर पाप होता है।
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