(इस (११।११९) पाप के करने पर पूर्वोक्त (११।११७-११८) विधि से याग तथा हवन करके वह क्षतव्रत ब्रह्मचारी) गधे का चमड़ा ओढ़कर अपने पाप को कहता हुआ सात घरों में भिक्षा माँगे।
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