मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 121
एतस्मिन्नेनसि प्राप्ते वसित्वा गर्दभाजिनम्‌ । सप्तागारांश्चरेद्धैक्षं स्वकर्म परिकीर्तयन्‌ ।।
(इस (११।११९) पाप के करने पर पूर्वोक्त (११।११७-११८) विधि से याग तथा हवन करके वह क्षतव्रत ब्रह्मचारी) गधे का चमड़ा ओढ़कर अपने पाप को कहता हुआ सात घरों में भिक्षा माँगे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें