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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 119
कामतो रेतसः सेकं व्रतस्थस्य द्विजन्मनः । अतिक्रमं व्रतस्याहुर्धर्मज्ञा ब्रह्मवादिनः ।।
ब्रह्मचर्यावस्था में रहने वाला जो द्विज इच्छापूर्वक (स्त्री के साथ सम्भोग करता हुआ) वीर्यपात कर (ब्रह्मचर्य) व्रत को भंग करता है, उसे “अवकीर्णी” कहते हैं।
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