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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 108
चतुर्थकालमश्वीयादक्षारलवणं मितम्‌ । गोमूत्रेणाचरेत्स्नानं द्वौ मासौ नियतेन्द्रियः ।।
इसके बाद दो मास तक (द्वितीय तथा तृतीय मास में) गोमूत्र से स्नान करता हुआ जितेन्द्रिय होकर चौथे काल (आज प्रातःकाल भोजन कर फिर दूसरे दिन सायङ्काल इसी क्रम से सर्वदा) कृत्रिम नमक से रहित (सेंधा नमक खाया जा सकता है) थोड़ा हविष्यान्न भोजन करे।
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