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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 107
उपपातकसंयुक्तो गोघ्नो मासं यवान्पिबेत्‌ । कृतवापो वसेद्वोष्ठे चर्मणा तेन संवृतः ।।
उपपातक से युक्त गोघातक शिखासहित मुण्डन कराकर उस (मारी हुई) गाय के चमड़े से शरीर को ढककर एक मास (पतले) यव को पीता हुआ गोशाला में निवास करे।
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