मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 106
एतैर्ब्रतैरपोहेयुर्महापातकिनो मलम्‌ । उपपातकिनस्त्वेवमेभिर्नानाविधै्ब्तैः ।।
भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि इन (११।१०७-११८) ब्रतों से महापातकी (११।५३) लोग अपने पापों को नष्ट करें तथा उपपातकी लोग इन (११।५८-६५) अनेक प्रकार के व्रतो से अपने पाप को दूर करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें