स्वयं वा शिश्नवृषणावुत्कृत्याधाय चाञ्जलौ ।
नैत्रहती दिशमातिष्ठेदानिपातादजिह्यगः ।।
अथवा अपने लिङ्ग तथा अण्डकोष को स्वयं काटकर अञ्जलि में लेकर सीधा होकर (कुटिल भावना का त्यागकर) जब तक गिरे अर्थात् मरे नहीं तब तक नैऋत्य दिशा की ओर चले।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।