मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 10
यज्ञश्रेत्प्रतिरुद्धः स्यादेकेनाङ्गेन यजञ्चनः । ब्राह्मणस्य विशेषेण धार्मिके सति राजनि ।।
यज्ञ करते हुए क्षत्रिय का, विशेषकर ब्राह्मण का यज्ञ आदि एक अङ्ग से (धनाभाव के कारण) पूरा नहीं हो रहा हो तो राजा के धर्मात्मा रहने पर यह ब्राह्मण या क्षत्रिय यज्ञकर्ता बहुत पशु वाले, पाक-यज्ञादि नहीं करने वाले तथा सोमयज्ञ से भी हीन जो वैश्य हों।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें