तदण्डमभवद्धैमं सहस्रांशुसमप्रभम् ।
तस्मिञ्जज्ञे स्वयं ब्रह्मा सर्वलोकपितामहः ॥
वह बीज एक स्वर्णमय अण्ड(हिरण्यगर्भ) के रूप में प्रकट हुआ, जिसकी प्रभा हजारों सूर्य के समान थी। उसी हिरण्यगर्भ से समस्त लोकों के पितामह, स्वयं ब्रह्मा प्रकट हुए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।