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मनुस्मृति • अध्याय 1 • श्लोक 72
दैविकानां युगानां तु सहस्रं परिसङ्ख्यया । ब्राह्ममेकमहर्ज्ञेयं तावतीं रात्रिमेव च ॥
देवताओं के 'समय-चक्र', संख्या में एक हजार, ब्रह्मा के एक 'दिन' के रूप में माने जाने चाहिए; और (उनकी) 'रात' भी इतनी ही है।
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