योऽसावतीन्द्रियग्राह्यः सूक्ष्मोऽव्यक्तः सनातनः ।
सर्वभूतमयोऽचिन्त्यः स एव स्वयमुद्बभौ ॥
जो इन्द्रियों की पहुँच से परे(अतीन्द्रियग्राह्य), अत्यन्त सूक्ष्म, अव्यक्त, सनातन, समस्त प्राणियों में व्याप्त तथा अचिन्त्य हैं, वही स्वयं प्रकट हुए।
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