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मनुस्मृति • अध्याय 1 • श्लोक 56
यदाऽणुमात्रिको भूत्वा बीजं स्थाणु चरिष्णु च । समाविशति संसृष्टस्तदा मूर्तिं विमुञ्चति ॥
जब सूक्ष्म कणों से युक्त होकर जीव चलायमान अथवा अचल बीज में प्रवेश करता है, तब पूर्वोक्त (सूक्ष्म शरीर) से संयुक्त होकर (नया) शरीर ग्रहण करता है।
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