तपो वाचं रतिं चैव कामं च क्रोधमेव च ।
सृष्टिं ससर्ज चैवैमां स्रष्टुमिच्छन्निमाः प्रजाः ॥
इन प्राणियों को उत्पन्न करने की इच्छा से उन्होंने तप, वाक्, सुख, काम और क्रोध सहित इस सम्पूर्ण सृष्टि की रचना की।
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