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मनुस्मृति • अध्याय 1 • श्लोक 2
भगवन् सर्ववर्णानां यथावदनुपूर्वशः । अन्तरप्रभवानां च धर्मान्नो वक्तुमर्हसि ॥
हे भगवन्! आप कृपा करके समस्त वर्णों के धर्मों का, तथा उनसे उत्पन्न मिश्र जातियों (अन्तरप्रभव) के धर्मों का भी, क्रमानुसार और यथार्थ रूप से हमें उपदेश करने की कृपा करें।
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