इन अत्यन्त तेजस्वी सात पुरुषों(तत्त्वों) की सूक्ष्म मूर्तिमात्राओं से, उस अव्यय(अविनाशी कारण) से यह व्ययशील(नश्वर, परिवर्तनशील) जगत् उत्पन्न होता है।
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