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मनुस्मृति • अध्याय 1 • श्लोक 17
यन् मूर्त्यवयवाः सूक्ष्मास्तानीमान्याश्रयन्ति षट् । तस्माच्छरीरमित्याहुस्तस्य मूर्तिं मनीषिणः ॥
जिन छः तत्त्वों के सूक्ष्म अवयव इन स्थूल अवयवों में आश्रय ग्रहण करते हैं, उसी कारण मनीषीजन उस संघात को शरीर कहते हैं। अर्थात्, इन छः तत्त्वों के आश्रयभूत रूप को ही शरीर की संज्ञा दी गई है।
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