जिन छः तत्त्वों के सूक्ष्म अवयव इन स्थूल अवयवों में आश्रय ग्रहण करते हैं, उसी कारण मनीषीजन उस संघात को शरीर कहते हैं। अर्थात्, इन छः तत्त्वों के आश्रयभूत रूप को ही शरीर की संज्ञा दी गई है।
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