मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 1 • श्लोक 14
उद्बबर्हात्मनश्चैव मनः सदसदात्मकम् । मनसश्चाप्यहङ्कारमभिमन्तारमीश्वरम् ॥ ब्छ्।स्छ् ॥
अपने में से उसने मन को उत्पन्न किया। जो अस्तित्वमान और गैर - अस्तित्व की प्रकृति का हिस्सा है। मन के सामने, उन्होंने अहंकार के सर्व - शक्तिशाली सिद्धांत को सामने लाया जिसका कार्य आत्म - चेतना में निहित है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें