उन्होंने अपने ही स्वरूप सेमन की उत्पत्ति की, जो सत् और असत् दोनों का ग्रहण करने वाला है। और मन से अहंकार की उत्पत्ति की, जो 'मैं' भाव का अभिमान करने वाला तथा अधिष्ठाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।